Posts

Showing posts from December, 2020

सालगिरह

सोचता हूँ तेरे सालगिरह पर क्या नायाब लिक्खूँ तुझको कली कहूँ या फ़िर खिलता ग़ुलाब लिक्खूँ इश्क़ की सुनहरी राह और तुझसा हसीन साथी तुझे मल्लिका-ए-हुस्न या महकता शबाब लिक्खूँ  एक सफर है ये जिंदगी बस आज की बात नहीं तुझ जैसे हमसफ़र के लिए रोज़ नये ख़्वाब लिक्खूँ ! #आशुतोष