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पहल

लग जाती है लोगों को छोटी सी बात, क्यूँ ऐसे हो गए मेरे गाँव के हालात ! आज बुज़ुर्गों का ज़माना याद आता है, पांच गाँव का साथ खाना याद आता है ! एक दूसरे से लोग रूठते गये, नादानियों में घर टूटते गये ! समस्याओँ को साथ मिलकर हल करना होगा, कोई और करें न करें, हमें  पहल करना होगा!  खोया हुआ संस्कार हमें वापस लाना होगा, अपने गाँव को बिखरने से बचाना होगा!