#London_Terror_Attack

मज़हब के नाम पर अजब खेल चल रहा है,
कौन है जो इस कदर मासूमों को छल रहा है !

धर्म कोई भी हो अमन ही सिखाती है,
फिर क्यूँ रह रह कर ये देश जल रहा है !

कुर्सी की लालच में इंसानियत को भूल बैठे,
मज़हबी ठेकेदारों का कारवाँ फल रहा है !

सदमें में हैं लोग, दहशत में राहगीर,
रस्ते तो वही हैं पर वक़्त बदल रहा है !

किसकी थी ख़ता, किसको मिली सज़ा,
सबके सीने में एक तूफ़ान पल रहा है !

-आशुतोष कुमार

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