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Showing posts from August, 2018

अटल

तू कल था, तू आज है, तू कल रहेगा ! तू अटल था, तू अटल है, तू अटल रहेगा ! यूँ तो कई आये, कई आएंगे, राजनीती करने वाले, पर संविधान की गरिमा में, तू अचल रहेगा ! सम्बोधनों और सभाओं में भाषा मर्यादा खो रही, पर संसद हो या सड़क, तू कवि निश्छल रहेगा ! दल बदल के दल दल में, डूबते जाते सत्ता मोही, घर घर कमल का फूल खिला, तू एक दल रहेगा ! देशभक्त कहलाने को, कई झूठी कस्मे खाएंगे, पर माँ भारती के दिल में, तू हर पल रहेगा ! तू कल था, तू आज है, तू कल रहेगा ! तू अटल था, तू अटल है, तू अटल रहेगा ! - आशुतोष के श्रद्धा सुमन

हम चलते रहे

जिन्हे छलना था, वो छलते रहे ! हमें चलना था, हम चलते रहे !! बस अपनी तन्हाई काटनी थी उन्हें, और हमारी आँखों में, सपने पलते रहे ! अकेले में जब भी मिला मुझे खुदा बताया, पर भरी महफ़िल में, हम उन्हें खलते रहे ! जब तलक हम मुफलिसी में थे, वो हमदर्द थे, कुछ बुलंदी को जो छुआ हमने, तो बैठे जलते रहे ! कुछ सोची समझी चाल थी, कुछ ग़लतफ़हमियाँ, वो वक़्त के हिसाब से, अपनी नीयत बदलते रहे ! जिस चमन में गये, चुन ली सारी कलियाँ, बेचारे भवरों के दिल में, अरमान मचलते रहे ! कुछ रहनुमा भी मिले दुनिया के सफर में, रूहानी हाथ बढ़ते रहे, करम फलते रहे ! जिन्हे छलना था, वो छलते रहे ! हमें चलना था, हम चलते रहे !! -आशुतोष