मैं जिंदगी हूँ

ना मैं पूजा, ना बंदगी हूँ,
जीने दो मुझे, मैं जिंदगी हूँ!

ना मैं अच्छा, ना बुरा हूँ ,
जैसा भी हूँ, मैं पूरा हूँ!

ना मैं ऊँच, ना नीच हूँ,
इन्सान हूँ, मैं सब के बीच हूँ!

ना मैं ग़लत, ना सही हूँ,
मौन हूँ, मैं अनकही हूँ!

ना मैं स्वर्ग, ना नरक हूँ,
मुक़्त हूँ, मैं बेधड़क हूँ!

ना मैं पुण्य, ना पाप हूँ,
प्रेम हूँ, मैं बेमाप हूँ!

ना मैं अंगुलिमाल, ना बुद्ध हूँ,
निष्कपट हूँ, मैं शुद्ध हूँ!

ना मैं जीत, ना हार हूँ,
पुरुषार्थ हूँ, मैं अपार हूँ!

ना मैं सुख, ना दुःख हूँ,
स्थितप्रज्ञ हूँ, मैं ईश्वरोन्मुख हूँ !

-आशुतोष चौधरी 

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