Posts

Showing posts from February, 2018

शिवरात्रि

हे आशुतोष, मेरे अंतर मन में  आत्म विश्रान्ति भर दे, हे नीलकंठ, हे महादेव, मुझको तू शिवाला कर दे ! आसमाँ में बैठा कोई गजब खेल खेल रहा है, भूखे नंगे पेड़ो पे बर्फ के फ़व्वारे उड़ेल रहा है ! क्या हुआ ग़र ये पेड़ पत्तों से भरा न था, बस पतझड़ का असर था, मरा न था !

सरहद

सरहद से हम लौट के, घर आ न पाए! हाथ में थी बन्दुक, पर चला न पाए !! वो हम वतन हो के भी, हम पर पत्थर बरसाते रहे , हम बेबस इतने, कि उन्हें आँखें भी दिखा न पाए ! वर्दी की लाज बचाने को, हम लात घूंसे भी खाते रहे, ख़ून खौलता रहा रगों में ,और हम ऊँगली भी उठा न पाए ! क़दम क़दम पर वो छूरा घोपने को पीठ खोजते रहे, और हम उनकी गोलीओं से, अपना सीना छुपा न पाए ! अचानक जब सामना हुआ दहशतग़र्दों से इस बार, धड़ें तो सारी काट दी हमने, पर जड़ तक जा न पाए ! अरे सेना को घुसकर लड़ने की अब तो इजाजत दो, ताकि और कोई नापाक़ आतंकी, फ़िर इस पार न आए ! जा रहा हूँ दुनिया से एक यही प्रार्थना कर, कि मेरे जाने की खबर, कोई मेरी माँ को न बताए ! जल्द लौट के आऊंगा माँ भारती की गोद में, ख्याल रहे देशप्रेम का चिराग़, कोई बुझा न पाए ! -आशुतोष

मैं जिंदगी हूँ

ना मैं पूजा, ना बंदगी हूँ, जीने दो मुझे, मैं जिंदगी हूँ! ना मैं अच्छा, ना बुरा हूँ , जैसा भी हूँ, मैं पूरा हूँ! ना मैं ऊँच, ना नीच हूँ, इन्सान हूँ, मैं सब के बीच हूँ! ना मैं ग़लत, ना सही हूँ, मौन हूँ, मैं अनकही हूँ! ना मैं स्वर्ग, ना नरक हूँ, मुक़्त हूँ, मैं बेधड़क हूँ! ना मैं पुण्य, ना पाप हूँ, प्रेम हूँ, मैं बेमाप हूँ! ना मैं अंगुलिमाल, ना बुद्ध हूँ, निष्कपट हूँ, मैं शुद्ध हूँ! ना मैं जीत, ना हार हूँ, पुरुषार्थ हूँ, मैं अपार हूँ! ना मैं सुख, ना दुःख हूँ, स्थितप्रज्ञ हूँ, मैं ईश्वरोन्मुख हूँ ! -आशुतोष चौधरी