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Showing posts from December, 2017

ख्याल रखना

अच्छा नहीं किसी से मिल कर दिल में मलाल रखना, उसके अंदर भी चल रही है कोई जंग ख्याल रखना ! आँखों में धूल झोंकना उनकी फ़ितरत में हो तो हो अपने हाथों में मगर तुम गुलाल रखना ! क्या पता वो यादों का झौंका कब आ जाये अपनी जेब में हमेशा एक रुमाल रखना ! न जाने किस घड़ी वो दे दे दरवाजे पे दस्तक स्वागत को उनके पूजा का थाल रखना ! खुश्बू के लुटेरे बढे आते हैं चमन में फूलों से कह दो काँटों का ढाल रखना ! -आशुतोष 

खोने लगा है

जो यकीं था मुझको कल तक, अब वो खोने लगा है मुस्कुराता रहता था जो अक्सर, अब वो रोने लगा है ! जब तक हसरतें जवाँ थी, दुनिया हसीं थीं वादों का जो गुलदस्ता था, अब वो कोने लगा है ! पहले दिन कहो तो दिन थी, रात कहो तो रात थी फूल झड़ते थे लवों से जो, काँटा बन अब वो चुभोने लगा है ! दो जिस्म एक जान, आत्मा भी एक हो गयी थी शायद पता नहीं फिर क्यों, अकेले अब वो सोने लगा है ! त्यौहारों के मेले अपने पराये संग चलते थे मेलों के रेले, दूर नजदीक के सारे रिश्ते, अब वो ढ़ोने लगा है ! मुँह मीठा किये बिना घर से निकलते न थे कभी खेतों में गन्ने की जगह करेले,  अब वो बोने लगा है ! नयी जवानी नयी उमंग धड़कने भी जवाँ थीं कभी जाने अनजाने किये सारे गुनाह, अब वो धोने लगा है ! जिसे देवता बनाकर चाहतों ने पूजा था कभी   मिट्टी का पुतला, फिर से, मिट्टी अब वो होने लगा है !

नही रहा

मनस्वियों का सतयुग सा जपना नहीं रहा,  तपस्वियों का त्रेता सा तपना नहीं रहा ! ढूंढ़ रहा हूँ नक़्शे में एक नया शहर,  शहर में अपने अब कोई अपना नहीं रहा !  तरसते रहे नींद को हम बरसों तलक,  अब इन आँखों में कोई सपना नहीं रहा !  दिल के बाजार में कही बिक गयी लैला ,  अब गलियों में मजनूँ का तड़पना नहीं रहा !  काली होती गयी शामें और बुझते गए दीये ,  अब बागों में जुगनुओ का पनपना नहीं रहा !  पहाड़ों का सीना तो हम भी चीड़ सकते थे ,  पर किसी की याद में दिल का धड़कना नहीं रहा ! -आशुतोष